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???? 54 लाख रुपये की नई टंकी में दरारों की जांच पूरी, लेकिन शिकायत करने वाले को रिपोर्ट नहीं दी जा रही

by Newslineexpres@1

54 लाख रुपये की नई टंकी में दरारों की जांच पूरी, लेकिन शिकायत करने वाले को रिपोर्ट नहीं दी जा रही

????  कहीं सच दबाने की कोशिश तो नहीं हो रही ?

???? अधिकारी चुप, मंत्री तक नहीं पहुंचा; मामला उलझा

???? अगर जांच साफ है, तो रिपोर्ट जनतक करने से डर क्यों? और अगर गड़बड़ियां सामने आई हैं, तो कार्रवाई क्यों नही?

   पटियाला, 2 मार्च – न्यूज़लाईन एक्सप्रेस –
पटियाला जिले के अकालगढ़ गांव में 54 लाख रुपये की लागत से बनी पानी की टंकी का मामला अब न सिर्फ घटिया कंस्ट्रक्शन, बल्कि एडमिनिस्ट्रेटिव जटिलता और जवाबदेही से बचने का भी उदाहरण बनता जा रहा है।

बनने के सिर्फ दो महीने बाद ही टंकी में आई दरारों ने क्वालिटी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। मामले की जांच के लिए एक कमेटी बनाई गई थी और यह भी कहा जा रहा है कि रिपोर्ट तैयार है। लेकिन सवाल यह है कि अगर रिपोर्ट तैयार है, तो उसके नतीजे लोगों को क्यों नहीं बताए जा रहे?  शिकायतकर्ता और मीडिया के लगातार संपर्क के बावजूद, संबंधित अधिकारियों का रवैया हैरानीकुन  और गैर-ज़िम्मेदाराना लग रहा है। कुछ अधिकारियों का कहना है कि उन्हें मामले की जानकारी नहीं है, किसी का कहना है कि जांच पूरी हो चुकी है पर रिपोर्ट किसी और अधिकारी के पास है, जबकि कुछ एक-दूसरे पर डाल कर मामला दबाते लग रहे हैं और “उससे पूछो” या “फलां अधिकारी से बात करो” जैसे जवाब दे रहे हैं। यह तस्वीर साफ दिखाती है कि या तो बातचीत की भारी कमी है या जवाबदेही से बचने की कोशिश है।

   यह मामला बड़े अधिकारियों के सामने भी उठाया गया, लेकिन वहां से भी कोई साफ जवाब नहीं मिला। संबंधित मंत्री से संपर्क करने की कोशिशें नाकाम रहीं। हालांकि मामले की पूरी जानकारी और खबरें मंत्री के दो पर्सनल असिस्टेंट को अलग-अलग WhatsApp नंबरों से भेजकर कार्रवाई करने या फोन पर ऑफिशियल फीड देने का अनुरोध किया गया, लेकिन कई दिन बीत जाने के बावजूद कोई जवाब सामने नहीं आया है।

सवाल सीधा है —
अगर जांच साफ है, तो रिपोर्ट जनतक करने से डर क्यों? और अगर गड़बड़ियां सामने आई हैं, तो कार्रवाई क्यों नहीं?
लोग सरकारी पैसे से बने इस टैंकी का हिसाब मांग रहे हैं। जनता के टैक्स के पैसे से बने प्रोजेक्ट्स में ट्रांसपेरेंसी कोई एहसान नहीं, यह लोगों का हक है।

अकालगढ़ का यह मामला अब सिर्फ एक टैंकी का नहीं, बल्कि सिस्टम की सच्चाई का सवाल बन गया है।

दूसरी तरफ, गांव अकालगढ़ के रहने वाले गुरतेज सिंह ने यह भी कहा कि इस बारे में वाटर सप्लाई एंड सैनिटेशन डिपार्टमेंट (मैकेनिकल डिवीजन), पटियाला के एक्सियन से भी बात की गई, जिन्होंने इस बारे में सही फैक्ट्स सामने लाने की बात कही है।     Newsline Express

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