Skip to main content

newslineexpres

Breaking News
Joe Rogan Podcasts You Must Listen
Home Uncategorized ???? सिक्ख जत्थों पर प्रतिबंध क्यों जायज़ है!

???? सिक्ख जत्थों पर प्रतिबंध क्यों जायज़ है!

by Newslineexpres@1

???? सिक्ख जत्थों पर प्रतिबंध क्यों जायज़ है !

श्री गुरु नानक देव जी की जयंती पर सिक्ख जत्थों को पाकिस्तान जाने की अनुमति न देने के केंद्र सरकार के फैसले ने राजनीतिक भूचाल ला दिया है। लेकिन इतिहास और मौजूदा सुरक्षा हालात को देखते हुए, यह कदम न तो नया है और न ही भेदभावपूर्ण। यह एक सोच-समझकर लिया गया फैसला ही लगता है, जिसका मुख्य उद्देश्य श्रद्धालुओं के जीवन की रक्षा करना है।

???? ऐतिहासिक व्यवधान

विभाजन के बाद से ही सिख तीर्थयात्राएँ व्यवधानों का शिकार रही हैं। 1947 के विस्थापन और खूनी दंगों के बाद, ननकाना साहिब, करतारपुर जैसे कई ऐतिहासिक गुरुद्वारे पाकिस्तान में ही रह गए। दशकों तक सीमाएँ बंद रहीं, पुल टूट गए, और हिन्दू सिक्ख श्रद्धालु केवल दूर से ही प्रार्थना कर सकते थे।

???? पिछले वर्षों में, तीर्थयात्राएँ बार-बार विफल रहीं :

  • 1965 के युद्ध के बाद:  जसर जैसे पुलों के नष्ट होने से सीमा तीर्थयात्राएँ लगभग समाप्त हो गईं।
  • जून 2019:   सुरक्षा कारणों से लगभग 150 तीर्थयात्रियों को अटारी में रोक दिया गया।
  • मार्च 2020–नवंबर 2021:   नवंबर 2019 में खुला करतारपुर कॉरिडोर कोविड के कारण 20 महीने तक बंद रहा।
  • मई 2025:  ऑपरेशन सिंदूर के बाद कॉरिडोर अचानक बंद कर दिया गया और 150 तीर्थयात्रियों को उसी दिन वापस लौटना पड़ा।
  • जून 2025:   गुरु अर्जन देव जी के शहीदी दिवस पर लाहौर जाने वाले जत्थे को केंद्र सरकार ने मंज़ूरी नहीं दी।

इस पैटर्न से साफ़ है कि जब भी राष्ट्रीय सुरक्षा को ख़तरा हुआ, तीर्थयात्रा रोक दी गई, चाहे धार्मिक भावनाएँ कितनी भी गहरी क्यों न हों।

???? पाकिस्तान की दोहरी नीति

पाकिस्तान ख़ुद को सिक्ख विरासत का संरक्षक बताता है, लेकिन अपने अल्पसंख्यकों के प्रति उसका व्यवहार बेहद क्रूर रहा है। गुरुद्वारों में तोड़फोड़ की गई, मंदिरों को नष्ट किया गया और जबरन धर्म परिवर्तन कराया गया। वहाँ जाने वाले समूहों को अक्सर खालिस्तानी दुष्प्रचार बताया जाता था। यह सब पाकिस्तान के राजनीतिक खेल का हिस्सा है।

???? वर्तमान आवश्यकता :

पहले पहलगाम हमले और ऑपरेशन सिंदूर के बाद तनाव बढ़ गया है। ऐसे समय में बड़ी संख्या में समूहों को पाकिस्तान भेजना खतरे से खेलने के समान है। कई लोग इसकी तुलना भारत-पाकिस्तान क्रिकेट से करते हैं, लेकिन खिलाड़ी भारी सरकारी सुरक्षा में जाते हैं, जबकि तीर्थयात्री दूर-दूर तक फैले होते हैं और आसान निशाने पर होते हैं।

???? परिणाम :

सिक्ख समुदाय हमेशा देश के साथ खड़ा रहा है। वह जानता है कि राज्य का पहला कर्तव्य अपने नागरिकों के जीवन की रक्षा करना है। विभाजन ने तीर्थयात्राओं को रोक दिया, युद्धों और आतंकवाद ने भी ऐसा ही किया। आज का प्रतिबंध भी इससे अलग नहीं है। यह धर्म के साथ टकराव नहीं है, बल्कि सुरक्षा के साथ निभाई गई ज़िम्मेदारी है। गुरुद्वारे हमारे लिए परम पवित्र हैं, लेकिन नागरिकों का जीवन और राष्ट्र की अखंडता सबसे महत्वपूर्ण है। Newsline Express

Related Articles

Leave a Comment