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???? वाराणसी में गंगा का रौद्र रूप…सड़कों तक पहुंचा पानी

by Newslineexpres@1

– अस्सी घाट हुआ जलमग्न

– काशी में मणिकर्णिका घाट पर लाशों की लाइन;छत पर साथ जल रहीं 10 चिताएं

– पहली बार नमो घाट पूरी तरह बंद

उत्तर प्रदेश, 4 अगस्त – न्यूज़लाईन एक्सप्रेस – उत्तर प्रदेश के वाराणसी में गंगा का जलस्तर अब खतरें के निशान से ऊपर है। सड़को पर नाव चलनी शुरू हो गई है। गलियो में भी गंगा का पानी घुस चुका है। वाराणसी में गंगा के खतरनाक अवतार से अब शहरी इलाके के लोग भी डरने लगे है। वरुणा नदी के उफान के कारण अब सैकड़ो मकान भी पानी में डूब चुकें है।

वाराणसी में गंगा का जल स्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया है। इससे बाढ़ का संकट और गहरा हो गया है। पहली बार नमो घाट को पूरी तरह बंद कर दिया गया है। घाट पर बना आकर्षक नमस्ते संरचना अब पूरी तरह से डूबने की कगार पर है।

इसलिए पर्यटकों और श्रद्धालुओं की आवाजाही रोक दी गई है। इससे पहले नमो घाट पर बाढ़ का पानी इतना नहीं आया था। वहीं, जलस्तर इतनी तेजी से बढ़ रहा है कि शीतला घाट की सड़क पर पानी पहुंच गया है। अस्सी घाट की सड़कों पर जलभराव है।

काशी का महाश्मशान मणिकर्णिका घाट गंगा में डूब गया है। घाट से करीब 15 फीट ऊपर छत पर दाह संस्कार किया जा रहा है। यहां अंतिम संस्कार के लिए लाशों की लाइन लग रही है। 5 से 6 घंटे का इंतजार करना पड़ रहा है।

बाढ़ और बारिश के कारण लकडियां गिली हैं। इनको जलने में 5 घंटे लग रहे हैं। लोग कफन से लिपटी लाशों के बीच बैठकर अपनी बारी का इंतजार करते दिखे। आलम यह है कि एक साथ 8-10 लाशें जलाई जा रही हैं।
यही स्थिति हरिश्चंद्र घाट का है। यहां 3 फीट चौड़ी गली में घरों के बगल में शवदाह हो रहा है। काशी में 84 घाटों तक गंगा का पानी पहुंच चुका है। 10 हजार दुकानों को शिफ्ट करना पड़ा है।

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